
रैरुमा चौकी के सामने से गुजर रहे मवेशियों के काफिले, एसएसपी शशि मोहन सिंह के ‘ऑपरेशन शंखनाद’ पर उठे गंभीर सवाल; भारतमाला सड़क बनी तस्करों का सुगम रास्ता
जोहार छत्तीसगढ़ – धरमजयगढ़।
जिले में गौवंश तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए एसएसपी शशि मोहन सिंह द्वारा चलाया जा रहा ‘ऑपरेशन शंखनाद’ आखिर धरातल पर कितना प्रभावी है? यह सवाल अब चरखापारा मवेशी बाजार और रैरुमा चौकी क्षेत्र में उठने लगा है। आरोप है कि मवेशी बाजार की आड़ में बड़े पैमाने पर गौवंश की तस्करी का खेल संचालित हो रहा है और जिम्मेदार पुलिसकर्मी इस पर प्रभावी रोक लगाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारी और लगाए जा रहे आरोपों के मुताबिक, चरखापारा मवेशी बाजार में प्रत्येक सोमवार को बड़ी संख्या में मवेशियों की खरीद-बिक्री होती है। इसी बाजार की आड़ लेकर कथित तस्करों द्वारा सैकड़ों नहीं, बल्कि हजारों की संख्या में मवेशियों को झारखंड की ओर ले जाने की बात सामने आ रही है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में मवेशियों को दूसरे राज्य की ओर ले जाया जा रहा है, तो उनकी खरीद-बिक्री, परिवहन दस्तावेज और वैधता की जांच आखिर कौन कर रहा है?
रैरुमा चौकी के सामने से गुजरते मवेशियों के काफिले, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपों के अनुसार प्रत्येक सोमवार को मवेशियों के बड़े-बड़े काफिले रैरुमा चौकी के सामने से गुजरते हैं। इसके बावजूद यदि इन मवेशियों के परिवहन की विधिवत जांच नहीं हो रही है, तो यह पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या चौकी पुलिस को इसकी जानकारी नहीं है या फिर जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है? आखिर चौकी के सामने से गुजरने वाले इन काफिलों पर जिम्मेदार अधिकारियों की नजर क्यों नहीं पड़ रही है?
भारतमाला सड़क बनी कथित तस्करों का सुगम रास्ता
निर्माणाधीन भारतमाला सड़क का इस्तेमाल भी कथित तौर पर मवेशियों को झारखंड की ओर ले जाने के लिए किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि चरखापारा मवेशी बाजार से मवेशियों को इस मार्ग से आगे बढ़ाकर झारखंड के बुच्चड़खानों तक पहुंचाने का आरोप है। यदि यह जानकारी सही है, तो यह केवल गौवंश संरक्षण का मामला नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय पशु तस्करी पर पुलिस की निगरानी व्यवस्था का भी बड़ा सवाल है।
एसएसपी के सख्त निर्देशों को चुनौती दे रहे तस्कर?
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने जिले में गौवंश तस्करी रोकने और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए ऑपरेशन शंखनाद शुरू किया है। लेकिन चरखापारा मवेशी बाजार से जुड़े इन गंभीर आरोपों ने अभियान की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जिले में तस्करी रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी हैं, तो फिर रैरुमा चौकी क्षेत्र में कथित रूप से इतना बड़ा खेल कैसे संचालित हो रहा है?
अब सवाल सीधे रैरुमा चौकी प्रभारी और संबंधित पुलिस अधिकारियों से है कि क्या प्रत्येक सोमवार को मवेशियों के परिवहन की जांच की जाती है? क्या बाजार से निकलने वाले मवेशियों के वैध दस्तावेजों का सत्यापन होता है? यदि नहीं, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
एसएसपी शशि मोहन सिंह से मांग है कि चरखापारा मवेशी बाजार, रैरुमा चौकी और भारतमाला सड़क मार्ग से होने वाले मवेशी परिवहन की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यदि पुलिसकर्मियों की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई हो। आखिर ऑपरेशन शंखनाद केवल कागजों और आदेशों तक सीमित रहेगा या गौवंश तस्करी के इस कथित नेटवर्क पर वास्तव में कार्रवाई भी होगी?
